राजति रमण लाल निशि सैजा।

राजति रमण लाल निशि सैजा।
निरखौ नेकहु छबी बनी कैसी,खडा करिकै कर आनन टैका।
सखी करै बीजण ठाडी सिराहनौ,करवट लई सखी ओरही देखा।
चंचल चितवनी सखी दई छैडी,तापै मुस्कावत मन हरि लैता।
दिखावै लाज उर हरषै "प्यारी",चाहवै लिपट होवै इनसौ ऐका।

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