युगल लीला 1
रात्री का समय।एक बडे से हिंडोले पर युगल सरकार रस भरै पौढे है।हिंडोला मद्धिम गति से स्वतः ही हिलौरे ले रहा है।रंगीले युगल ने एक सिराहने पर अपने युुगल शीश व एक सिराहने पर युगल पद रखे हुए है।युगल पद इस प्रकार से जोडे मे विराजित है की प्यारी जु के दाएँ पद के संग प्यारे जु बायाँ पद व प्यारी जु के बाएँ पद के संग प्यारे जु का दाया पद मिलित है।
हिंडोले के एक ओर से प्यारी जु के लंब,खुले केश व चूनर का छोर हिंडोले की गति से गति मिला लहरा रहे है तो हिंडोले के दूसरे छोर पर प्यारे जु के खुले केश व खुलकर पटके का रूप ले चुकी पग भी हिंडोले की गति का अनुसरण कर रही है।दोनो नयन मूंदै युगल रस सिंधु की अनंत गहरी लहर मे डूब चूके है,ह्रदय से ह्रदय मे समाए हुए,गंभीर मुख छटा बिखेरते,हिलते हिंडौले से बेखबर.........रंगीले युगल।
रस सिंधु डूबै दोऊ रंगीलै।
बिन भूषण बसन अति झीनै,बिथुरि अलक पौन संग खैलै।
मंद हिरत हिंडौर आप आप ही,पद मिलित जुगल रहै रसिलै।
बंद नयन गहन अति रस सिंधु,अति गहरै पौढै सब भूलै।
प्यारी कहै कौन बतियावै कोऊ,रस केलि निरख मौन रहै फूलै।
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