माखन चोरी
माखन चोरी
काकी नाय कहिए मैय्या माखन चुराया।
पकरू कान ऐसो कबहु ना करूगौ।
जावू कही पाव तोरी चौखट न धरूगौ।
चुगली काकी भली माई सो न करियौ।
लै सौटी मारै अति हिय मौरा डरियौ।
पैय्या परू री तौरे कोउ सौ न कहियौ।
कर जोरि बिनती चुप ठाडी रहियौ।
कहत कहत स्वर रूध्यौ लाल कौ।
दुई अश्रु बिंदु आये ढुलक कपोल पौ।
कैसो हिय काकी कौ सह भला पावै।
झट पकरि लाला अंक लगावै।
डरपे रे नाय लाला कोउ सो न कहवू।
जो चाहवै तो ओर माखन खवावू।
बलिहारी रूप लाल मलूक लुभावै।
बलि बलि ऐसो सोहणो लाल प्यारी जावै।
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