कहाँ क्या बात थी ए जी
कहाँ क्या बात थी ऐ जी,मुझ बिना प्राणो की पोरी मे
तेरी बस एक छूवन से मै,प्राण संगीत कर बैठी.......
खुशबुए तो थी तब भी सब,सुमन मे रंग भी थे ही
तेरी रंगत से मिलकर मै,इनसे पर प्रीत कर बैठी......
मै कंकड थी कोई छोटी,कही थी धूल मे रहती
तूने जो छू लिया तो बस,एक अद्भुत चीज बन बैठी......
न अब है प्राण न हूँ खाली,तुमसे बस है भरी "प्यारी"
तेरे अब साथ से हो क्या,हार कौ जीत कर बैठी.......
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