वंशी काहे अधर लगाई

बंशी काहै अधर लगाई।
बास की पोरी मरी छेद छदीली  , बिनु प्राणन कहा तोय भायी।
ना तो रूपमती नार नाय कुलीना  ,  बिनु हित तैने शीश चढाई।
काढै नवनीत नाछाछ बिलौय सके,कहो कहा तोय तबहु पवाई।
कहो कित्त बाँधै नुपुर रास रचावै,थई ता तत् कैसो ताल मिलाई।
याकै बस नाय कछु करतब थारो ,थारी श्वास याए मधुर बनाई।
ऐसी निरगुणी तऊ काहे अंग-संग राखो,कहो ऐसो काय पाई बडाई।
तनमन सरबस दीन्हे ह्यौ भी तो,बिरह हमे याकौ संग च्यो फिराई।
ऐरी बंशी वा दिन भूलै तू ढीठता ,जा दिनु हाथन तू "प्यारी" आई।
कहो तापै प्यारी प्राण तै बाँसुरी ,बिनती लिजौ ह्यौ बाँसुरी घढाई।

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