रस दरस सौवती

रस दरस सौवती जौरि के।
पडे सल चादर श्वेत चमकनि,अरु अधर मुहर सिरहानै पे।
सुमन लरी परी टूटी पियकी,परै प्यारी योई बिखरै से।
ऐडी चाप आधी बनी महावर सौ,मोर पखा पद प्यारी पे।
सुख देखि सुख पई अतिही,"प्यारी" बलिहारी जोरि केलि के।

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