राधिके कृपा
राधिके किरपा
हा! राधिके किरपा करो।
निज महल सेबा को वरो।
कर जोरी तौरे पायन परू।
तुव चरणन निज शीश धरू।
दासी चरणन कर लिजिए।
सोहणी सेबा मोय दिजिए।
गहवर वन को वास देओ।
जग झंझट सो उबार लेओ।
जरा अगन हियहि प्रीत कौ।
टूटे झूठा जग भरम हौ।
रंग रस तुव केलि करो।
दासी चरणा चित्त लगाय धरो।
निज टहल महल की दीजिए।
प्यारी दासी कर लिजिए।
Comments
Post a Comment