हम सौ दीन हीन

हम सौ दीन हीन कौ जग मे।
रमण तजि जबसौ गए मौहे,तब सौ दीखै लाचार ह्यौ सब मे।
निज कहवन वारौ ना कोऊ,बिनु चंदा खिलै तारे ज्यौ नभ मे।
अरू ओरि साँसन बढि गइहै,इक इक लगै अनगिन जन्मा से।
हारी "प्यारी" सहतौ जे सबई,रख लिजौ अबहु ह्यौ संग मे।

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