रमणा मिलन आये जमुना तीरे
रमणा मिलन आए जमुना तीरे।
कही मिलनी बैठी राह देखती, जमुना भाति चले पल अति धीरे।
छुप आए दबा चाप पाम-की,गति हित बाढि जानि पियही नीकै।
आए बैठे जई पूछी मन-की , सबई बिसरि गए बैन मौरे जी-कै।
जानि हाल उर लाड लडा-दी,मरिकै लाज छुपा लई मुख पी-मै।
पूछी कही कछु सुनिही उनकी,ता रोई "प्यारी" गए लौटे छनही-मे।
Comments
Post a Comment