छकत नाहीं

छकत नाहि
निरखत नैन छकत नाही।
जुगल जोरी अति अनुपा,निरख परख न नैन अघाते।
कबहु नैनन चरण अटकतै,कबहु मुख चंद्र चकोर ह्यै जाते।
मुरली टेर मधुर कर्ण पीबतै,बीरी रस अधर लाल ललचातै।
मृदु मुस्कनि कबहु नैनन टोना,कबहु चित्त चंचल चितवनि फसाते।
हाय कबहु प्यारी अधम भाग हौ,कबहु टेर नैनन बहि आते।

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