मति धरि घट भू दाबिये

मति धरि घट भू दाबिए,नाते दो नीर सलाय।
नव दुल्हिन संग प्रीतम चली,यौ प्रेम गली मे आय।।१।।
*
नेम गये नियम गये,गये बरत उपवास।
ता पै अचरज यह री,गयी भूख अरू प्यास।।२।।
*
जाँचत बैद्य कहा कहे,नबज टटौलिए लाख।
रोग रोगी इन जानिए,बाकि तो करत कयास।।३।।
*
सुनने वारौ कौन है,कौन शबद कहै बात।
भीतर ही भीतर भरै,भरि नैननि छलकै जात।।४।।
*
बिचारे कछु कहे कछु,अरू करत है कछु ओर।
उर प्यारी भयौ बाबरा,जबतै लखे नंद-किशोर।।५।।
*
.
दोहा----यातै पाछै आप आपिमै,करत विचार विहार।
     "प्यारी" टहल महल निज राज मे,देत युगल सरकार।।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया