देखो दोऊ सोबत कुँज भवन

देखो दोउ सोबत कुँज भवन माँहि ।
शीतकाल ओढ़े दोउ रजाई ,परस्पर पकरि दोउ बांहि ।
गरम  अंगीठी  राखि भवन  में , तनिको ठंड न जांहि ।
प्रात भयो जागौ युगलबर , सखिन माधुर्य मुख चाहिँ ।
माधुर्य गाय जगाबत विरहणी , दोउ सरकार सदा ही ।

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