श्रीराधारमण झुके
श्री राधारमण झुकै दृग नीचै।
प्राणप्रिया चित्त चरण अटकि गयै,नैननि जल सौ रहै इन सींचै।
इकटक चित्र छबि जावक कै,तूलिका नैन भरि रहै खींचै।
बड-बड भाग बडै जानि जावक,बनि रहू बस्यौ चरण कुँवरि-कै।
योई करै आस प्रियापिय "प्यारी",होय सुख ज्यौई त्यौई रस पीजै।
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